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Showing posts from September, 2020

भिल्ल व रामोशी कोण होते? महाराष्ट्रात त्यांचा इतिहास काय आहे?

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भिल्ल व रामोशी कोण होते? महाराष्ट्रात त्यांचा इतिहास काय आहे? हि माहिती कदाचित खुप कमी लोकांना माहित आहे कारण या समाजातील खुप कमी लोक quora वर आहेत . छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या काळापासून या समाजाबद्दल जास्त माहिती मिळते . शिवाजी महाराजांच्या काळात शिवाजी महाराजांचे गुप्तहेर हे मुख्यतः रामोशी समाजाचे होते , आणि या समाजाचं किल्ल्यांची सुरक्षा करणे हे काम होत . किल्यांच्या बाहेर किंवा किल्ल्याभोवती रामोशी समाज्याच्या लोकांची घर असावीत हे छत्रपती शिवाजी महाराजांचे नियम होते . शिवाजी महाराजांच्या गुप्तहेर खात्याचे प्रमुख 'बहिर्जी नाईक' हे रामोशी समाजाचे होते . ते शिवाजी महाराजांचे सर्वात निकट होते स्वराज्य निर्मितीपासून ते संभाजी महाराजांच्या मृत्यू पर्यंत ते स्वराज्याची सेवा करत होते . महाराजांची कोणतीही मोहीम असो जोपर्यत नाईकांचा संदेश येत नव्हता तो पर्यंत महाराज आगेकूच कात नवते . ज्यास्त माहिती साठी इथे भेटू शकता . बहिर्जी नाईक कोण होते ? सविस्तर माहिती - HDmarathi त्याच बरोबर भिल्ल व रामोशी त्यांच्यापासून आपल्या भारताच्या स्वातंत्र संग्रामाला सुरवात झाली हो...

आदिवासी माना जमात

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आदिवासी माना जमात August 04, 2018 Mana Shakti

ठाकरेंचं मूळ कुठलं? प्रबोधनकार नेमकं काय सांगतात?

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ठाकरेंचं मूळ कुठलं? प्रबोधनकार नेमकं काय सांगतात? बुधवारी दिवसभर काँग्रेसचे नेते दिग्विजय सिंग यांचे ट्विट गाजत होते. त्यात ते म्हणतात,  ‘ प्रबोधनकार ठाकरे (राज ठाकरेंचे आजोबा) समग्र वाङ्मय पाचव्या खंडाचे ४५ वे पान पाहा. मनोहर जोशी मुख्यमंत्री असताना महाराष्ट्र सरकारनेच हे प्रसिद्ध केले आहे. त्यात ठाकरे घराण्याचा प्रवास इतिहास बिहारमधील मगधपासून भोपाळ ते चित्तोडगड ते मांडवगड ते पुणे असा शोधता येतो. ’ महाराष्ट्राला आत्मभान देणा-या या महान विचारवंताचं डॉक्युमेंटेशन असणा-या  prabodhankar.com    या वेबसाईटचं संपादन, संशोधन मी केलं होतं. दोन वर्षांपूर्वी ही साईट आली होती. त्यामुळे अनेक पत्रकार मित्रांनी फोन करून माहिती विचारली. तीन टीवी चॅनलांनी इंटरव्यूही केले. त्यावेळी प्रबोधनकारांच्या झालेल्या थोड्याफार अभ्यासातून या ट्विटकडे बघताना समोर येणारे हे काही मुद्दे इथे मांडतो आहे. राजकारण बाजूला ठेवून निदान आपण तरी याकडे बघायला हवं. -         -  होय महाराष्ट्र सरकारने (महाराष्ट्र साहित्य आणि संस्कृती मंडळाने) प्रकाशित केलेल्या प्र...

चांग नागा

चांग नागा    चांग नागा  ( अंग्रेज़ी :  Chang Naga )  भारत  के  नागालैण्ड राज्य  में बसने वाला एक समुदाय है। यह  नागा  समुदाय की एक शाखा है और चांग भाषा बोलती है।

पारधी जनजाति

पारधी जनजाति    पारधी जनजाति   मध्य प्रदेश  राज्य के  रायसेन  एवं  सीहोर  में पाई जाती है। 'पारधी'  मराठी  शब्द 'पारध' का तद्भव रूप है, जिसका अर्थ होता है- 'आखेट'। इस जाति का मुख्य व्यवसाय जाल में पशु-पक्षियों एवं जानवरों को फँसाकर उनका शिकार करना है। मोटे तौर पर पारधी जनजाति के साथ बहेलियों को भी शामिल कर लिया जाता है। अनुसूचित जनजातियों की शासकीय सूची में भी इस जनजाति के अंतर्गत बहेलियों को सम्मिलित किया गया है। भारतकोश के संस्थापक/संपादक के फ़ेसबुक लाइव के लिए यहाँ क्लिक करें। पारधी जनजाति    पारधी जनजाति   मध्य प्रदेश  राज्य के  रायसेन  एवं  सीहोर  में पाई जाती है। 'पारधी'  मराठी  शब्द 'पारध' का तद्भव रूप है, जिसका अर्थ होता है- 'आखेट'। इस जाति का मुख्य व्यवसाय जाल में पशु-पक्षियों एवं जानवरों को फँसाकर उनका शिकार करना है। मोटे तौर पर पारधी जनजाति के साथ बहेलियों को भी शामिल कर लिया जाता है। अनुसूचित जनजातियों की शासकीय सूची में भी इस जनजाति के अंतर्गत बहेलियों को सम्मिलित किया गया है...

द्रविड़

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द्रविड़    द्रविड़ एक  बहुविकल्पी शब्द  है अन्य अर्थों के लिए देखें :-  द्रविड़ (बहुविकल्पी) भारत  में बसी हुई प्राचीनतम प्रजातियों में से एक, जो एक उत्तर और दक्षिण दोनों भागों में फैली हुई थी। कालांतर में उत्तर भारत के द्रविड़  मेसोपोटामिया  (वर्तमान ईरान) की ओर चले गये और रास्ते में  बलूचिस्तान  में अपनी  ब्राहुई  शाखा छोड़ गये जो आज भी द्रविड़ भाषा से मिलती-जुलती बोली बोलते हैं। उत्तर भारत के द्रविड़ लोगों को  आर्यों  ने दक्षिण की ओर खदेड़ दिया। आर्यों की सभ्यता और संस्कृति द्रविड़ों के मुक़ाबले निचले दर्जे की थी, लेकिन अच्छे योद्धा होने के कारण उत्तर भारत में अपनी सत्ता स्थापित करने में वे सफल हो गये। उत्तर में आर्यों के जम जाने के बावजूद दक्षिण भारत में द्रविड़ लोगों की सत्ता शताब्दियों तक क़ायम रही। इनकी सन्तान आज भी दक्षिण भारत में है जो  तमिल ,  तेलुगु ,  कन्नड़  और  मलयालम भाषाएँ बोलती है। इन भाषाओं का मूल उद्भव  संस्कृत  से नहीं हुआ है जो आर्यों की भाषा मानी जाती है। समय बी...

तोमर

तोमर    तोमर   राजपूतों  की एक प्रमुख शाखा है, जिसका  भारतीय इतिहास  में महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। तोमर राजाओं में राजा  अनंगपाल  ने  इतिहास  में काफ़ी प्रसिद्धि प्राप्त की है। कुछ विद्वानों का यह भी कथन है कि  प्रतिहारों  और  चौहानों  की भाँति ही तोमर भी विदेशी थे, जिन्होंने बाद में  भारत  के कुछ इलाकों को जीतकर अपना राज्य स्थापित किया था। तोमर लोग 11वीं शताब्दी में वर्तमान  दिल्ली  क्षेत्र के शासक हुआ करते थे। तोमरों में अग्रणी राजा अनंगपाल ने 11वीं शताब्दी के मध्य में  दिल्ली  नगर की नींव डाली थी। प्रसिद्ध 'लौहस्तम्भ', जिस पर 'चन्द्र' नामक अपरिचित राजा की प्रशस्ति अंकित है, 1052 ई. में अनंगपाल द्वारा हटाकर वर्तमान स्थान पर लाया गया था। राजा अनंगपाल द्वारा यह लोहस्तम्भ बाद में मन्दिरों के बीच में खड़ा कर दिया गया था।  मुस्लिम  विजेताओं ने इन मन्दिरों को बाद में नष्ट-भ्रष्ट कर डाला। मन्दिरों से प्राप्त इन सामग्री का उपयोग एक मस्जिद और  कुतुबमीनार  के निर्माण में किय...

महार

महार    महार  अनेक सगोत्रीय जातियों का समूह, जो अधिकांशत:  भारत  के  महाराष्ट्र  और पड़ोसी राज्यों में रहता है। ये ज़्यादातर महाराष्ट्र की शासकीय  भाषा   मराठी  बोलते हैं। [1] संख्या माना जाता है कि  1980  के दशक की शुरुआत में  महाराष्ट्र  की कुल जनसंख्या का नौ प्रतिशत महारों का था, जिसे उस समय क्षेत्र की आधिकारिक तौर पर चिन्हित सभी अनुसूचित जातियों [2]  में सबसे बड़े क्षेत्र में फैली विशाल और महत्त्वपूर्ण जाति माना जाता था। व्यवसाय परंपरागत रूप से महार  ग्राम  के बाहर रहते थे और समूचे ग्राम के लिए कई प्रकार के काम करते थे। ये चौकीदारी, संदेशवाहक, दीवारों की मरम्मत करने, सीमा विवादों का निर्णय करने, सड़कें साफ़ करने और मृत जानवरों को उठाने जैसे कार्य करते थे। महार  कृषि  मज़दूर के रूप में भी कार्य करते थे और कुछ के पास अपनी ज़मीन भी थी, हालांकि ये मूलत: किसान नहीं थे। 20वीं सदी के मध्य में बड़ी संख्या में महार  मुंबई (भूतपूर्ण बंबई),  नागपुर ,  पुणे  (भूतपूर्ण पूना) और...

महार

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महार महाराष्ट्रीयन सामाजिक समूह महार  एक प्रमुख सामाजिक समूह है जो  महाराष्ट्र  राज्य और आसपास के राज्यों में रहता हैं।  महार , चमार  और  जाटव  इन तिन्हाे समूह में सब लाेग बाैद्ध धर्मिय बन गए है। महाराष्ट्र की कुल जनसंख्या में १८% लोग बौद्ध है। [1]  सभी महार आज लगभग  बौद्ध  बन चूके है। महाराष्ट्र में बौद्ध एवं महार जनसंख्या २०% है। सम्पूर्ण महार समूह २०वी सदीं में  डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर  द्वारा अपनाये गए  बौद्ध धर्म  का अनुसरण करता है। [2] [3]  बुद्धिमान मानवविज्ञानी श्रीमती  इरावती कर्वे  की उसकी पुस्तक महाराष्ट्र, भूमि और लोग   डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर  और  तथागत   गौतम बुद्ध  इनकें मुख्य आदर्श है। महार कुल जनसंख्या 2,20,00,000   महाराष्ट्र की जनसंख्या में 20% से अधिक महार है, जिनमें ९८% बौद्ध  बने है। ख़ास आवास क्षेत्र महाराष्ट्र  के सभी क्षेत्रों में भाषाएँ मराठी ,  विदर्भी धर्म बौद्ध धर्म ,  हिन्दू धर्म इतिहास  ब्रिटिशो ने 1९वीं सदी में अपनी सेना ...